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1889

About School

विद्यालय के बारे में
School building, front elevation
Main Building
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दानापुर मंडल में खगौल स्थित रेलवे स्कूल की स्थापना नवम्बर 1889 को हुई थी। प्रारम्भ में यह विद्यालय कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था। उस समय यह विद्यालय E.I.R. के अधीन समिति, पटना से संबद्ध हुआ।

इस विद्यालय के सौ वर्ष पूरे होने पर कालांतर में यह पटना विश्वविद्यालय से तथा बिहार विद्यालय परीक्षा रेलवे बोर्ड ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसे इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड कराने का आदेश पारित किया, तथा बाद में इसे वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी, दानापुर ने CBSE से संबद्धता दिलाने में अपनी महती भूमिका निभाई — जिसके फलस्वरूप यह विद्यालय अप्रैल 2016 से सीधे CBSE बोर्ड से संबद्ध हो गया।

इस विद्यालय में कक्षा 1 से 12वीं तक की शिक्षा प्रदान की जाती है। इंटर में कला और विज्ञान संकाय में नामांकन लिया जा रहा है। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी है, लेकिन छात्र चाहें तो हिन्दी में भी परीक्षा दे सकते हैं। अब तक इस विद्यालय से पढ़कर बहुतेरे छात्रों ने आई॰ए॰एस॰, आई॰पी॰एस॰, आई॰एफ॰एस॰, आई॰आर॰पी॰एस॰, जज, डॉक्टर, इंजीनियर, रेलवे बोर्ड के मेम्बर प्रभृति कई ऊँचे ओहदे को सुशोभित किया है।

Notable Alumni

Roles our students have gone on to hold

A century-plus of graduates now serving across public life

IAS Officers IPS Officers IFS Officers IRPS Officers Judges Doctors Engineers Railway Board Members Advocates
School building, side view with grounds
Grounds & Playfield
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रेलवे स्कूल की ज़मीन को स्थानीय जमींदार रायबहादुर बाबू अनुग्रह नारायण सिंह जी ने दान में भेंट की थी। अभी भी स्कूल के प्रति उनके परिवार का स्नेह एवं लगाव बना हुआ है।

बालक मानव का जनक होता है, तथा जैसा हम बोते हैं वैसा ही काटते हैं। इस उक्ति को चरितार्थ करने में इस विद्यालय के प्रत्येक शिक्षक एवं सहकर्मी अपनी-अपनी भूमिका का सफल निर्वाह कर रहे हैं। हमें खगौल की जनता, रेल प्रशासन एवं अभिभावकों से भी पूरा-पूरा सहयोग मिल रहा है।

जिस प्रकार गागर में सागर, समुद्र में सीपी और स्वाति में चातक की जो पिपासा होती है, उसी प्रकार हमारे छात्र ज्ञान पिपासु बनकर अपनी प्रतिभा को समुन्नत बनाये रखें एवं आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका अदा करें — हमारी यही शुभकामना है।

Child is a father of man — and as we sow, so shall we reap.
In memory of Rai Bahadur Babu Anugrah Narayan Singh, donor of the school land

इस भूमि-दान की स्मृति आज भी विद्यालय की नींव में जीवित है — यह वही भावना है जो हर शिक्षक, हर अभिभावक और हर छात्र को एक साझे उद्देश्य से जोड़ती है: ज्ञान का सम्मान, और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण।

Gyaneshwar, Principal

शुभेषी — ज्ञानेश्वर की ओर से समस्त विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।

— Gyaneshwar, Principal